पर्यावरण के साथ संवेदनाओं का संगम, दुर्गेश पांडे की अनूठी पहल ने बदला नोएडा का चेहरा

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि, दिल्ली क्षेत्र की अपर आयुक्त (आयकर विभाग) स्मिता सिंह (IRS) थीं। उन्होंने जब एक नन्हे से पौधे को हाथ में लिया और उसकी मिट्टी को स्पर्श किया, तो आंखों में भावनाएं साफ़ दिखीं।

पर्यावरण के साथ संवेदनाओं का संगम, दुर्गेश पांडे की अनूठी पहल ने बदला नोएडा का चेहरा

हर पेड़ केवल लकड़ी नहीं होता, वह छांव होता है, हवा होता है, भविष्य होता है। इसी भविष्य को बचाने के लिए समाजसेवी दुर्गेश पांडे ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर नोएडा स्टेडियम को हरियाली की चादर से ढक दिया। 'पेड़ अपनों के लिए' इस भावुक संकल्प के साथ उन्होंने 40 से अधिक छायादार और औषधीय पौधे रोपित करवाए, हर पौधा एक अपने के नाम, हर जड़ में एक भाव।यह आयोजन सिर्फ एक पौधरोपण कार्यक्रम नहीं था, यह एक चेतना थी,जो मिट्टी की सोंधी गंध से उपजी और जिम्मेदार नागरिकों की सांसों से फली-फूली।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि, दिल्ली क्षेत्र की अपर आयुक्त (आयकर विभाग) स्मिता सिंह (IRS) थीं। उन्होंने जब एक नन्हे से पौधे को हाथ में लिया और उसकी मिट्टी को स्पर्श किया, तो आंखों में भावनाएं साफ़ दिखीं। उन्होंने कहा, "दुर्गेश का यह प्रयास केवल पर्यावरण के लिए नहीं, बल्कि चेतना के लिए है। मंच और मान के बिना, वे जिस निःस्वार्थता से समाज के लिए जुटे हैं, वह आज के युवाओं के लिए मिसाल है।"

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर मौजूद थे अनुराग बहादुर, निदेशक – कात्यायनी प्लास्टिक इंडस्ट्रीज प्रा. लि., नोएडा। उन्होंने कहा,"जब एक उद्योगपति पर्यावरण प्रेमी के मंच पर आता है, तो यह संकेत है कि विकास और प्रकृति अब एक-दूसरे के विरोधी नहीं, सहयोगी हो सकते हैं।"

विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे आनंद मोहन सिंह, निदेशक, कृषि विभाग, नोएडा। उन्होंने कहा,"यह आयोजन हमें हमारी जड़ों की ओर लौटने का निमंत्रण है। हमें समझना होगा कि पेड़ लगाना केवल एक औपचारिकता नहीं, हमारी सांस्कृतिक और मानवीय ज़िम्मेदारी है।"

"पेड़ अपनों के लिए": भावनाओं से सींचा गया आंदोलन
दुर्गेश पांडे ने जब माइक संभाला, तो शब्दों से अधिक मौन ने असर किया। उन्होंने कहा,"हर पौधा मेरे किसी अपने के नाम है — मां के लिए नीम, पिता के लिए पीपल, बेटी के लिए अमलतास, और देश के लिए अशोक। यह सिर्फ हरियाली नहीं, मेरे जीवन के सबसे अपने रिश्तों को धरती में बोने का प्रयास है।" इस आयोजन में जो बात सबसे अलग थी, वह यह कि इसमें न कोई बड़ा मंच था, न कोई भारी-भरकम बैनर। सिर्फ एक टेंट, कुछ गमले, और दर्जनों संवेदनशील लोग, जो पेड़ों को सिर्फ ऑक्सीजन का स्रोत नहीं, संवेदनाओं का विस्तार मानते थे।

जनसहभागिता और जागरूकता का संगम
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, युवा छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरण प्रेमी शामिल हुए। सबने मिलकर पौधरोपण किया और हर एक पौधे को नाम दिया — जैसे "मां का नीम", "दादी की छांव", "सैनिक का अशोक"। यह नामकरण सिर्फ प्रतीक नहीं था, यह जुड़ाव था — जो इन पेड़ों को सिर्फ प्रकृति नहीं, परिवार का हिस्सा बना देता है।

मिट्टी की सोंधी साक्षी और भविष्य की हरियाली
इस दौरान एक लघु विचार गोष्ठी भी हुई, जहां वक्ताओं ने जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई, और जीवनशैली में हरियाली की जरूरत पर बात की। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को एक-एक पौधा उपहार में दिया गया — साथ ही यह संकल्प भी कि "एक पेड़, एक प्राण – हम उसके जीवन के जिम्मेदार हैं।दुर्गेश पांडे ने बताया कि यह अभियान अब यहीं नहीं रुकेगा। वह आने वाले महीनों में नोएडा के विभिन्न स्कूलों, सोसाइटियों और पार्कों में इसी भावना के साथ कार्यक्रम आयोजित करेंगे।